आपदा प्रबंधन या डिजास्टर मैनेजमेंट (Disaster Management)

देश और विदेशो में बड़ी आपदाओं के वक्त जब सिस्टम बेबस और लाचार सा नजर आता है, तब डिजास्टर मैनेजमेंट के एक्सपर्ट्स पीड़ित लोगों के जीवन को उम्मीद की डोर से बांधने का काम करते हैं. प्रकृति का बैलेंस बिगड़ने की वजह से लगभग हर साल आपदाएं आती हैं. इन्हीं आपदाओं से निपटने और जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए आपदा प्रबंधन या डिजास्टर मैनेजमेंट (Disaster Management) के ट्रेंड एंड एक्सपर्ट्स की जरूरत पड़ती है. ये आपदा के शिकार लोगों की जान बचाने और उन्हें नई जिंदगी देने के काम में माहिर होते हैं. इस फील्ड में करियर की कई संभावनाएं मौजूद है. अगर आप भी जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए काम करना चाहते हैं, तो डिजास्टर मैनेजमेंट एक अच्छा करियर ऑप्शन (Best Career Option) का फील्ड है. इस फील्ड में योग्य प्रोफेशनल्स को बेहतर सैलरी पैकेज और करियर में तरक्की के साथ विदेशों में काम करने का मौका भी मिलता है.

Disaster Manager Work: आपदा प्रबंधक का काम क्या है?

आपदा प्रबंधक का काम आपदा के बाद की स्थिति को नियंत्रित करने या पीड़ित व्यक्तियों की मदद करने तक ही सीमित नहीं है. वह आपदा पूर्व चेतावनी जारी करने के लिए अलर्ट सिस्टम भी डेवलप (Disaster Alert System) करता है. डिजास्टर मैनेजमेंट में ट्रेनिंग ले चुके प्रोफेशनल्स लोग आपदा के वक्त सरकारी सिस्टम की मदद करते हैं. इन्हें आपदा के शिकार लोगों की जान बचाने, उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाने, हर संभव राहत पहुंचाने और उनकी मेडिकल या अन्य जरूरतें पूरी करने की ट्रेनिंग दी जाती है.

Disaster Management Courses: डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स और योग्यता

डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर बैचलर डिग्री, पीजी डिप्लोमा, मास्टर डिग्री और पीएचडी लेवल के कोर्स ऑफर किए जाते हैं. सर्टिफिकेट के लिए 10वीं और बैचलर कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है. पीजी डिप्लोमा या मास्टर डिग्री कोर्स में एडमिशन के लिए ग्रेजुएशन (BA/ BSc/ BCom) होना जरूरी है. उम्मीदवार इस फील्ड में बीए, एमए, एमबीए, एमएससी, एमफिल, पीएचडी, रिसर्च, ट्रेनिंग प्रोग्राम्स, आदि कर सकते हैं.

 

इस फील्ड से जुड़े कुछ अन्य कोर्स हैं-

एमएससी इन डिजास्टर मिटिगेशन (MSc in Disaster Mitigation)

एमएससी इन जिओ-हैजर्ड (MSc Geo-Hazards)

फायर इंजीनियरिंग और सेफ्टी में डिग्री/ डिप्लोमा कोर्स

अर्थक्वेक इंजीनियरिंग (Earthquake Engineering) में एमटेक एवं पीएचडी आदि

डिजास्टर मैनेजमेंट में पीएचडी करने के लिए इससे संबंधित विषयों में 55 प्रतिशत अंक के साथ मास्टर डिग्री होना आवश्यक है.

आपदा प्रबंधन कोर्स में रिस्क असेसमेंट एंड प्रिवेंटिव स्ट्रैटजीज, लेजिस्लेटिव स्ट्रक्चर्स फॉर कंट्रोल ऑफ डिजास्टर मिटिगेशन, ऐप्लिकेशन ऑफ जीआईएस इन डिजास्टर मैनेजमेंट (GIS), रेस्क्यू जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. इसके अलावा माइनिंग, केमिकल डिजास्टर और टेक्निकल डिजास्टर जैसे फील्ड में स्पेशलाइजेशन के लिए भी कोर्स चलाए जाते हैं.

 

डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए जरूरी स्किल्स

इस फील्ड के प्रोफेशनल्स लोगों को जमीनी स्तर पर जोखिम भरी परिस्थितियों में समस्याओं से जूझना पड़ता है. इसलिए इस चैलेंजिंग फील्ड के प्रोफेशनल्स को माउंटेनियरिंग (Mountaineering) सहित कई तरह की ट्रेनिंग दी जाती है. इस फील्ड में काम करने वाले लोगों में प्रैक्टिकल नॉलेज के साथ तुरंत निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए. करियर में तरक्की के लिए उम्मीदवारों में कुछ कर गुजरने का जुनून और जज्बा होना चाहिए. समाज सेवा की भावना बनाए रखने से हरदम और बेहतर करने का साहस मिलता है.

 

आपदा प्रबंधन में नौकरियां

डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स के बाद गवर्नमेंट जॉब के मौके मिलते हैं. केंद्र और राज सरकार फायर डिपार्टमेंट, फ्लड कंट्रोल, ड्रॉट मैनेजमेंट, रेस्क्यू मैनेजमेंट आदि के लिए इन्हें नियुक्त करती है. इसके अलावा अपातकालीन सेवाएं, लॉ इन्फोर्समेंट, लोकल अथॉरिटीज, रिलीफ एजेंसी और यूनाइटेड नेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में नौकरी मिलती है. प्राइवेट सेक्टर में माइनिंग, केमिकल और पेट्रोलियम जैसी ज्यादा जोखिम वाली इंडस्ट्रीज में भी उनके लिए अवसर हो सकते हैं. इसके अलावा डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोफेशनल एनजीओ के साथ जुड़कर या स्वतंत्र रूप से सोशल वर्कर, एनवायर्नमेंट एक्सपर्ट या वॉलंटियर के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं.

आपदा प्रबंधन में सैलरी पैकेज

डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स करने के बाद शुरुआत में 25 से 30 हजार रुपये महीने की सैलरी आसानी से मिल जाती है. आगे अनुभव के आधार पर सैलरी बढ़कर 50 हजार से एक लाख रुपये तक हो सकती है. मास्टर कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को शुरू में तीन से चार लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया जाता है. टॉप इंस्टीट्यूट से कोर्स करने वालों को पांच से सात लाख रुपये का पैकेज मिलता है. इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को प्राइवेट और इंटरनेशनल एजेंसियां 10 से 12 लाख रुपये सालाना पैकेज ऑफर करती हैं.